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विशेष मौसमीय घटनाओं और आपदाजनक मौसम घटनाओं का संक्षिप्त परिचय

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बागवानी (Horticulture)
Horticulture ITI Trade

आईटीआई बागवानी ट्रेड पाठ्यक्रम 

आईटीआई "बागवानी" ट्रेड एक वर्षीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) द्वारा क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (सीटीएस) के तहत संचालित होता है। यह कोर्स प्रशिक्षुओं को फल, सब्जियाँ, फूल, और सजावटी पौधों की खेती, नर्सरी प्रबंधन, भूसज्जा, और टिकाऊ बागवानी तकनीकों में कौशल प्रदान करता है। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान, प्रायोगिक खेती विधियाँ, और रोजगार योग्यता कौशल शामिल हैं, जो छात्रों को कृषि फर्मों, सरकार

मृदा परीक्षण और फसल तकनीशियन
Soil Testing and Crop Technician

During the one-year duration of “Soil Testing and Crop Technician” trade a candidate is trained on professional skill, professional knowledge and Employability skillrelated to job role. In addition to this a candidate is entrusted to undertake project work and extracurricular activities to build up confidence. The broad components covered under Professional Skill subject are as below:-

फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग
Floriculture & Landscaping

आईटीआई फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग ट्रेड 

       आईटीआई "फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग" ट्रेड एक वर्षीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) द्वारा क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (सीटीएस) के तहत संचालित होता है। यह कोर्स प्रशिक्षुओं को फूलों और सजावटी पौधों की खेती, लैंडस्केप डिज़ाइन, और आवासीय, वाणिज्यिक, और सार्वजनिक स्थानों के लिए उद्यानों के रखरखाव में कौशल प्रदान करता है। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान, प्रायोगिक बागवानी कौशल, और रोजगार योग्यता प्रशिक्षण शामिल है, जो छात्रों को बागवानी फर्मों,

By iti | 2:52 PM IST, Mon March 30, 2026

विशेष मौसमीय घटनाओं और आपदाजनक मौसम घटनाओं का संक्षिप्त परिचय

विशेष मौसमीय घटनाएँ और खतरनाक मौसम परिस्थितियाँ कृषि और बागवानी पर गहरा प्रभाव डालती हैं। ये घटनाएँ फसलों, मिट्टी और कृषि प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। इनके स्वभाव, समय, क्षेत्र और प्रभाव को समझकर किसान उचित प्रबंधन उपाय अपना सकते हैं।

1. चक्रवाती तूफान और समुद्री लहर (स्टॉर्म सर्ज)

स्वभाव: चक्रवाती तूफान तेज हवाओं, भारी वर्षा और गरज-चमक के साथ बनने वाली निम्न दाब प्रणाली है। स्टॉर्म सर्ज समुद्र के जल स्तर का अचानक बढ़ना है।

समय और क्षेत्र: यह मुख्यतः तटीय क्षेत्रों जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में प्री-मानसून (अप्रैल–जून) और पोस्ट-मानसून (अक्टूबर–दिसंबर) में होता है।

फसलों पर प्रभाव: जलभराव, फसलों का गिरना (लॉजिंग), मिट्टी का कटाव और लवणता बढ़ना।

फसल प्रबंधन: वायु अवरोध (विंडब्रेक), उचित जल निकासी, लवण सहनशील किस्में और समय से पहले कटाई।

2. बाढ़

स्वभाव: बाढ़ अत्यधिक वर्षा या नदी के उफान से भूमि का जलमग्न होना है।

समय और क्षेत्र: मानसून (जून–सितंबर) में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सामान्यतः होती है।

फसलों पर प्रभाव: जलभराव, जड़ों को नुकसान, पोषक तत्वों का नुकसान और फसल नष्ट होना।

फसल प्रबंधन: ऊँची क्यारियाँ (Raised beds), जल निकासी व्यवस्था, बाढ़ सहनशील किस्में और पुनः बुवाई।

3. सूखा

स्वभाव: लंबे समय तक वर्षा की कमी के कारण जल की कमी होना।

समय और क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सामान्यतः होता है।

फसलों पर प्रभाव: पौधों का मुरझाना, वृद्धि में कमी, उत्पादन घट जाना और फसल नष्ट होना।

फसल प्रबंधन: सूखा सहनशील किस्में, मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण तकनीकें।

4. लू (हीट वेव) और शीत लहर (कोल्ड वेव)

स्वभाव: अत्यधिक गर्म तापमान को लू और अत्यधिक ठंड को शीत लहर कहते हैं।

समय और क्षेत्र: लू गर्मियों (अप्रैल–जून) में उत्तरी और मध्य भारत में होती है, जबकि शीत लहर सर्दियों (दिसंबर–जनवरी) में उत्तरी भारत में होती है।

फसलों पर प्रभाव: लू से पौधों में जल की कमी और पत्तियों का जलना, जबकि शीत लहर से पाला पड़ना और वृद्धि रुकना।

फसल प्रबंधन: गर्मी में सिंचाई, मल्चिंग और छायादार व्यवस्था; ठंड में सिंचाई, धुआँ करना और पाला से बचाव।

5. ओलावृष्टि (Hail Storm)

स्वभाव: ओलावृष्टि में बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े (ओले) गिरते हैं।

समय और क्षेत्र: सर्दी और प्री-मानसून में उत्तर और मध्य भारत में होती है।

फसलों पर प्रभाव: पत्तियों, फलों और तनों को नुकसान, जिससे उत्पादन कम हो जाता है।

फसल प्रबंधन: जाल (नेट) का उपयोग, समय पर कटाई और फसल बीमा।

6. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances)

स्वभाव: यह भूमध्यसागर क्षेत्र से आने वाली मौसम प्रणाली है, जो वर्षा और हिमपात लाती है।

समय और क्षेत्र: सर्दियों (दिसंबर–फरवरी) में उत्तरी भारत में प्रभावी होती है।

फसलों पर प्रभाव: रबी फसलों के लिए लाभकारी वर्षा, लेकिन अधिक वर्षा से नुकसान भी हो सकता है।

फसल प्रबंधन: उचित जल निकासी, समय पर बुवाई और अधिक नमी से बचाव।

निष्कर्ष

विशेष मौसमीय और आपदाजनक घटनाएँ कृषि उत्पादन को प्रभावित करती हैं। इनके बारे में जानकारी होने से किसान उचित प्रबंधन उपाय अपनाकर नुकसान कम कर सकते हैं। आईटीआई के बागवानी विद्यार्थियों के लिए इनका ज्ञान टिकाऊ और सफल खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बागवानी (Horticulture)

Horticulture ITI Trade

आईटीआई बागवानी ट्रेड पाठ्यक्रम 

आईटीआई "बागवानी" ट्रेड एक वर्षीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) द्वारा क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (सीटीएस) के तहत संचालित होता है। यह कोर्स प्रशिक्षुओं को फल, सब्जियाँ, फूल, और सजावटी पौधों की खेती, नर्सरी प्रबंधन, भूसज्जा, और टिकाऊ बागवानी तकनीकों में कौशल प्रदान करता है। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान, प्रायोगिक खेती विधियाँ, और रोजगार योग्यता कौशल शामिल हैं, जो छात्रों को कृषि फर्मों, सरकार

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